Sunday, September 20, 2015

मणिकर्णिका कुण्ड

बिना निमंत्रण के जब माता पार्वती अपने पिता जी के होने वाले महायग में गई और साथ में हट करके शिव जी को भी ले गई ,वहा अपने पिता से अपने पति यानी शिव जी का अपमान होता देख माता पार्वती खुद को उसी हवन कुण्ड में अग्नि के हवाले कर लिए और भगवान शिव उनके जलते हुए शरीर को अपने हाथो से उठाकर वापस कैलास पर्वत कई और आने लगे तो पार्वती जी के कानो की मणि (बाली) इसी स्थान पर गिरी थी !
मान्यता है यह कुण्ड पाताल लोक से जुड़ा हुआ है !यहाँ मरने वाला हर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है क्योकि हर काशी में हर मरने वालो के कानो में शिव स्वय तारक मन्त्र फूंकते है !



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