Friday, January 8, 2016
Tuesday, January 5, 2016
बीएचयू ट्रामा सेंटर
197 करोड़ की लागत से बने इस ट्रॉमा सेंटर के मोदी से उद्धाटन के लिए चार बार कार्यक्रम तय हुआ, लेकिन कभी बारिश तो कभी अधूरी तैयारियों की वजह से हर बार उद्धाटन टलता गया। वाराणसी में बना यह ट्रॉमा सेंटर यूपी, बिहार सहित पूर्वांचल के लिए बेशकीमती तोहफा है। आइए जानते हैं 334 बेड और 14 हाइटेक माड्यूलर ऑपरेशन थिएटर वाले ट्रॉमा सेंटर की क्या है खासियत-
ट्रॉमा सेंटर में देश-विदेश में मंगवाई गईं कई अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इसके अलावा मरीजों के बेहतर इलाज के लिए एक्सपर्ट डॉक्टर तैनात किए गए हैं। ट्रॉमा सेंटर की पूरी बिल्डिंग एयरकंडीशन है। यहां 50 बेड का स्पेशल आईसीयू बनाया गया है। इसके अलावा तीन बेड पर दो नर्स और आईसीयू में एक बेड पर एक नर्स की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा यहां कई मोबाइल एंबुलेंस को तैनात किया गया है। उन्हें सोशल नेटवर्किंट साइट से जोड़ा गया है।
44 एक्सपर्ट डॉक्टर की टीम की तैनाती
ट्रॉमा सेंटर में कुल 334 बेड हैं। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी, रजिस्ट्रेशन, सिटी स्कैन, रेडियोलॉजी, रिसेप्शन, एनाउंसमेंट केबिन की व्यवस्था की गई है। वहीं, फर्स्ट फ्लोर पर ओटी, सेकेंड फ्लोर पर आईसीयू, थर्ड और फोर्थ फ्लोर पर वार्ड बनाए गए हैं। फिफ्थ फ्लोर पर विशेष अधिकारी केबिन और कांफ्रेंस रूम बनाया गया है। न्यूरो सर्जरी, जनरल सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, आर्थोपेडिक्स, इमरजेंसी के लिए 44 एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम बनाई गई है, जिनके जिम्मे अलग-अलग विभाग होंगे। इसके अलावा 480 पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भी तैनाती की गई है।
50 इमरजेंसी आईसीयू
ट्रॉमा सेंटर में 6 इमरजेंसी वार्ड, 3 एडवांस मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, एक एडवांस इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर, 50 इमरजेंसी आईसीयू बना है। हर फ्लोर पर एनेस्थीसिया गैस सप्लाई सिस्टम, मेडिकल गैस लाइन पाइप लाइन सिस्टम, ऑटो ऑपरेटेड फायर फाइटिंग सिस्टम, 2500 वाट का डीजल जेनरेटर इमरजेंसी पॉवर बैकअप, 250 वाट का यूपीएस अनकट बिजली सप्लाई लगाया गया है।
चार बार मोदी के लिए बना कार्यक्रम
इससे पहले चार बाद ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन के लिए मोदी का कार्यक्रम तैयार किया गया, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से टलता गया। पिछली बार 16 जुलाई को वाराणसी आकर ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन एक दिन पहले कार्यक्रम स्थल पर करंट लगने से मजदूर की मौत होने के बाद मोदी ने दौरा रद्द कर दिया।
इससे पहले 28 जून 2015 को भारी बारिश के कारण मोदी का उद्घाटन कार्यक्रम कैंसल हो गया था। 25 दिसंबर 2014 को महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती पर भी ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन का प्रस्ताव था। मोदी वाराणसी पहुंचे, लेकिन जरूरी तैयारी नहीं होने की वजह से ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन नहीं कर सके। इससे पहले 14 अक्टूबर 2014 को उन्हें इसका उद्घाटन करना था, लेकिन साइक्लोन हुदहुद की वजह से उनका प्रोग्राम कैंसल हो गया था।
Trauma Center BHU
Multi-specialty trauma centre of Institute of Medical Science of Banaras Hindu University will finally be inaugurated by Prime Minister Narendra Modi on June 28 2015.
BHU arranged the site for the construction of trauma centre near its main campus where foundation stone of the varsity was laid. The civil works were started by CPWD in 2009 but instead of completing the work in the scheduled time by March 2011, it was completed by August 2013. This, one of the biggest trauma centre of the country will be run with the help of 264 senior residents, 99 junior residents and over 400 paramedical staffs.
Wednesday, December 30, 2015
नव वर्ष
नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है।
पश्चिमी नव वर्ष
नव वर्ष उत्सव ४००० वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार २१ मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी। रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व ४५वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व ४६ इस्वी को ४४५ दिनों का करना पड़ा था ।
हिब्रू नव वर्ष
हिब्रू मान्यताओं के अनुसार भगवान द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे। इस सात दिन के संधान के बाद नया वर्ष मनाया जाता है। यह दिन ग्रेगरी के कैलेंडर के मुताबिक ५ सितम्बर से ५ अक्टूबर के बीच आता है।
हिन्दू नया साल
हिन्दुयों का नया साल चैत्र नव रात्रि के प्रथम दिन यनि गुदी प हर साल चीनी कैलेंडर के अनुसार प्रथम मास का प्रथम चन्द्र दिवस नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह प्रायः २१ जनवरी से २१ फ़रवरी के बीच पड़ता है।
भारतीय नव वर्ष
भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः ये तिथि मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है। पंजाब में नया साल बैशाखी नाम से १३ अप्रैल को मनाई जाती है। सिख नानकशाही कैलंडर के अनुसार १४ मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिळ नव वर्ष भी आता है। तेलगु नया साल मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्रप्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग+आदि का अपभ्रंश) के रूप में मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नया साल विशु १३ या १४ अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल १५ जनवरी को नए साल के रूप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेंडर नवरेह १९ मार्च को होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड नया वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरूविजा नए साल के रूप में मनाया जाता है। मारवाड़ी नया साल दीपावली के दिन होता है। गुजराती नया साल दीपावली के दूसरे दिन होता है जो अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नया साल पोहेला बैसाखी १४ या १५ अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इसी दिन नया साल होता है।
इस्लामी नव वर्ष
इस्लामिक कैलेंडर का नया साल मुहर्रम होता है। इस्लामी कैलेंडर एक पूर्णतया चन्द्र आधारित कैलेंडर है जिसके कारण इसके बारह मासों का चक्र ३३ वर्षों में सौर कैलेंडर को एक बार घूम लेता है। इसके कारण नव वर्ष प्रचलित ग्रेगरी कैलेंडर में अलग अलग महीनों में पड़ता है।
कैलेंडरों का इतिहास
आजकल अधिकतर देश ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना चुके हैं। किन्तु अब भी कई देश ऐसे हैं जो प्राचीन कैलेंडरों का उपयोग करते हैं। इतिहास में कई देशों नें कैलेंडर बदले। आइए उनके विषय में एक नजर देखें:
समय घटना
३७६१ ई.पू. यहूदी कैलेंडर का आरंभ
२६३७ ई.पू. मूल चीनी कैलेंडर आरंभ हुआ
४५ ई.पू. रोमन साम्राज्य के द्वारा जूलियन कैलेंडर अपनाया गया
० इसाई कैलेंडर का आरंभ
७९ हिन्दू कैलेंडर आरंभ हुआ
५९७ ब्रिटेन में जूलियन कैलेंडर को अपनाया गया
६२२ इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत
१५८२ कैथोलिक देश ग्रेगोरियन कैलेंडर से परिचित हुए
१७५२ ब्रिटेन और उसके अमेरिका समेत सभी उपनिवेशो में ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया गया
१८७३ जापान नें ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया
१९४९ चीन नें ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया
माया कैलेंडर
जहां पर आज मैक्सिको का यूकाटन नामक स्थान है वहां किसी जमाने में माया सभ्यता के लोग रहा करते थे। माया सभ्यता के लोग ज्ञान विज्ञान गणित आदि के क्षेत्र में काफी अग्रणी थे। स्पेनी आक्रांताओं के आने के बाद उनकी सभ्यता और संस्कृति का धीरे धीरे क्षरण होने लगा । माया कैलेंडर में २०-२० दिनों के १८ महीने होते थे और ३६५ दिन पूरा करने के लिए ५ दिन अतिरिक्त जोड़ दिए जाते थे। इन ५ दिनों को अशुभ माना जाता था।
माया कैलेंडर के महीने:
Pop(पॉप), Uo(उओ), Zip(जिप), Zotz(जॉ्ट्ज), Tzec(टीजेक), Xul(जुल), Yaxkin(याक्सकिन), Mol(मोल), Chen(चेन), Yax(याक्स), Zac(जैक), Ceh(सेह), Mac(मैक), Kankin(कान किन), Muan(मुआन), Pax(पैक्स), Kayab(कयाब), Cumbu(कुम्बू)
ग्रेगोरियन कैलेंडर
वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग में आने वाला कैलेंडर ग्रेगोरियन है। इस कैलेंडर की शुरुआत पोप ग्रेगोरी तेरहवें नें सन १५८२ में की थी। इस कैलेंडर में प्रत्येक ४ वर्षों के बाद एक लीप वर्ष होता है जिसमें फरवरी माह २९ दिन का हो जाता है। आरंभ में कुछ गैर कैथोलिक देश जैसे ब्रिटेन नें ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाने से इंकार कर दिया था। ब्रिटेन में पहले जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था जो कि सौर वर्ष के आधार पर चलता था। इस कैलेंडर के मुताबिक एक वर्ष ३६५.२५ दिनों का होता था(जबकि असल में यह ३६५.२४२१९ दिनों का होता है) अत: यह कैलेंडर मौसमों के साथ कदम नही मिला पाया। इस समस्या को हल करने के लिए सन १७५२ में ब्रिटेन नें ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि ३ सितम्बर १४ सितम्बर में बदल गया। इसीलिए कहा जाता है कि ब्रिटेन के इतिहास में ३ सितंबर १७५२ से १३ सितंबर १७५२ तक कुछ भी घटित नही हुआ। इससे कुछ लोगों को भ्रम हुआ कि इससे उनका जीवनकाल ११ दिन कम हो गया और वे अपने जीवन के ११ दिन वापिस देने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।
हिब्रू और इस्लामी कैलेंडर
हिब्रू और इस्लामी कैलेंडर दोनों ही चंद्रमा की गति पर आधारित हैं। नये चंद्रमा के दिन अथवा उसके दिखाई देने के दिन से नववर्ष आरंभ होता है। लेकिन मौसम की वजह से कभी कभी चंद्रमा दिखाई नही देता अत: छपे कैलेंडरों में नव वर्ष की शुरूआत के दिनों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्र० हिब्रू महीने दिन इस्लामी महीने
१ तिशरी ३० मुहर्रम
२ हेशवान २९ सफ़र
३ किस्लेव ३० रबिया १
४ तेवेत २९ रबिया २
५ शेवत ३० जुमादा १
६ अदर २९ जुमादा २
७ निसान ३० रजाब
८ अइयर २९ शबान
९ सिवान ३० रमादान
१० तम्मूज २९ शव्वल
११ अव ३० धु-अल-कायदा
१२ एलुल २९ धु-अल-हिज्जाह
भारतीय कैलेंडर
भारतीय कैलेंडर सूर्य एवं चंद्रमा की गति के आधार पर चलता है और यह शक संवत से आरंभ होता है जो कि सन ७९ के बराबर है। इसका प्रयोग धार्मिक तथा अन्य त्योहारों की तिथि निर्धारित करने के लिए किया जाता है। किन्तु आधिकारिक रूप से ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रयोग होता है।
क्र० माह दिन ग्रेगोरियन दिनांक
१ चैत्र ३० २२ मार्च
२ वैशाख ३१ २१ अप्रैल
३ ज्येष्ठ ३१ २२ मई
४ आषाढ़ ३१ २२ जून
५ श्रावण ३१ २३ जुलाई
६ भ्राद्रपद ३१ २३ अगस्त
७ अश्विन ३० २३ सितम्बर
८ कार्तिक ३० २३ अक्टूबर
९ अग्रहायण ३० २२ नवम्बर
१० पूस ३० २२ दिसम्बर
११ माघ ३० २१ जनवरी
१२ फाल्गुन ३० २० फरवरी
लीप वर्ष में चैत्र ३१ दिन का होता है और वह २१ मार्च को आरंभ होता है|
चीनी कैलेंडर
भारत की ही तरह चीन नें भी ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपना लिया है फिर भी वहां छुट्टियां, त्योहार और नववर्ष इत्यादि चीनी कैलेंडर के अनुसार ही मनाए जाते हैं।
Friday, December 25, 2015
चर्च का घण्टा बजते ही क्रिसमस की खुशियों में डूबा शहर
धरती पर शांति व भाईचारे का संदेश देने के लिए फिर से ईसा मसीह का जन्म हुआ। 24 दिसम्बर को रात 12 बजते ही मसीही समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी। लोगों ने खुशी के गीत भी गाये। ओ हो प्यारी रात, ओ हो न्यारी रात, पुनीत है आगमन, ओहो शांति की रात गीत को गाया।
कैंट स्थित सेंट मेरीज कैथेड्रल में सुबह से ही चर्च में प्रभु ईसा मसीह के जन्म के तैयारी जोरो पर रही। गुरुवार की रात में लोग चर्च में जुटने लगे। चर्च की भी भव्य सजावट की गयी है जो रोशनी से जगमग हो रहा है। रात लगभग 11.30 बजे से ही मसीही समुदाय के लोगों ने विशेष आराधना आरंभ की। प्रभु ईसा मसीह के जन्म के बाद मसीही समुदाय के लोग कैरोल गीत गाने लगे। काशी काशी धर्मप्रांत के नवनिर्वाचित बिशप युजीन जोसेफ की अगुवाई में प्रभु ईसा जयंती मनायी जा रही है। रात में ठंड अपने चरम पर पहुंच चुकी है लेकिन मसीह समुदाय में प्रभु के जन्म का इतना अधिक जोश देखने को मिला कि उसके आगे ठंड भी बेअसर हो गयी। पूर्वांचल भर से लोग यहां पर जमा हुए है। फादर युजीन ने आपदा पीडि़तों, देश में हादसों में मारे गये लोग व देश के अमन के लिए प्रभु यीशु मसीह से प्रार्थना की गयी।
केट काटते ही गूंज उठा हैप्पी क्रिसमस
प्रभु ईसा मसीह के जन्म के बाद मसीही समुदाय के लोगों ने जैसे ही केक काटा, वैसे ही सभी हैप्पी क्रिसमस कह कर एक-दूसरे को बधाई देने लगे। सभी गा रहे थे कि मिलकर करें वंदना.. व आया यीशु जन्म हुआ। ऐसे गीतों से गिरजाघर देर रात तक गूंजते रहे।
शहर के प्रमुख गिराजघरों में भी मनाया गया क्रिसमस
शहर के प्रमुख गिरजाघरों में भी क्रिसमस की धूम रही। तेलियाबाग चर्च में धूमधाम से प्रभु ईसा मसीह का जन्म दिवस मनाया गया। लाल चर्च में क्रिसमसद इवनिंग व बोन फायर का आयोजन हुआ। बोन फायर के जरिये मसीही समुदाय के लोगों ने साल भर की बुराईयों को आग के हवाले किया। सेंट पॅाल चर्च सिगरा में रात 10.30 बजे से ही आराधना शुरू हुई, जो देर रात तक जारी रही।
तीन दिवसीय मेला भी शुरू
क्रिसमस के साथ सेंट मरीज महागिरजा में तीन दिवसीय मेले का आगाज हो गया है। 25 दिसम्बर को यहां पर शहर भर की भीड़ उमड़ती है। मेला 27 दिसम्बर तक चलेगा।
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