Sunday, July 17, 2016
Tuesday, July 12, 2016
National Geographic Travel Photographer Of The Year Contest 2016
Rooftop Dreams, Varanasi
Photo and caption by Yasmin Mund
It was 5:30 a.m. and I had just arrived in Varanasi, India, off a sleeper train. I got to my guesthouse and instinctively climbed the seven flights of stairs to see the sunrise over the famous Ganges River. As I looked over the side of the rooftop terrace, my jaw dropped in disbelief. Below were mothers, fathers, children, cats, dogs, and monkeys all sleeping on their roofs. It was midsummer in Varanasi and sleeping without air-conditioning was pretty difficult. Can you spot the curry?
CATEGORY:
People
LOCATION:
Varanasi, Uttar Pradesh, India
Courtesy : http://travel.nationalgeographic.com/
Photo and caption by Yasmin Mund
It was 5:30 a.m. and I had just arrived in Varanasi, India, off a sleeper train. I got to my guesthouse and instinctively climbed the seven flights of stairs to see the sunrise over the famous Ganges River. As I looked over the side of the rooftop terrace, my jaw dropped in disbelief. Below were mothers, fathers, children, cats, dogs, and monkeys all sleeping on their roofs. It was midsummer in Varanasi and sleeping without air-conditioning was pretty difficult. Can you spot the curry?
People
LOCATION:
Varanasi, Uttar Pradesh, India
Courtesy : http://travel.nationalgeographic.com/
Saturday, July 9, 2016
Shivpur Rathyatra
The Rath Yatra of Lord Jagannath on the traditional chariot on Saturday commenced in the city under heavy security deployment.Amidst traditional gaiety the devotees took out a procession with the idols of Lord Jagnnath, Subhadra and Balbhadra from the Jagnnath temple in Assi area. After three-day fair, held annually as a part of Rathyatra festival in Rathyatra Crossing, the procession culminated at Shivpur where the idols were placed on the beautifully decorated traditional chariot, after religious rituals.The one-day fair, held annually as a part of Rathyatra festival , in Shivpur Varanasi City.
Wednesday, July 6, 2016
रथयात्रा
भगवान जगन्नाथ के रथ पर सवार होने के साथ बुधवार को वाराणसी में रथयात्रा मेले की शुरुआत हो गयी। अपनी 200 से ज्यादा वर्षो पुरानी परंपरा को निभाते हुए बुधवार की सुबह भगवान जगन्नाथ ने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा संग रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दिए। मान्यता है कि बीमारी से ठीक होने के बाद भगवान घूमने के लिए रथ पर निकलते हैं जिसे रथयात्रा मेल कहा जाता है।
इस दौरान जगन्नाथ मंदिर के पुजारी राधेश्याम से बात करने पर उन्होंने बताया कि वाराणसी शहर के रथयात्रा चौराहे पर बुधवार की भोर से इस रथयात्रा मेले की शुरुआत हुई। सबसे पहले रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की आरती हुई जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों की भीड़ जुटी। उसके बाद भक्तों ने भगवान के रथ को खीच कर इस रथयात्रा मेले की शुरुआत की। वैसे तो रथयात्रा का यह पर्व मुख्य तौर पर पुरी में मनाया जाता है। मगर वाराणसी में भी इसकी शुरुआत पुरी ट्रस्ट के जरिये ही हुई और यहाँ भी यह उसी परंपरागत तरीके से मनाया जाता हैं।
मान्यता है कि रथयात्रा के इस पर्व पर भगवान अपने भाई और बहन के साथ नगर भ्रमण और अपनी मौसी के घर जाते हैं। भगवान के दर्शन और उनका रथ खीचने के लिए शहर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और यह पर्व एक मेला बन जाता है। भक्त ये मानते हैं कि रथयात्रा के पर्व पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
भगवान के आगमन पर रथयात्रा चौराहे स्थित इस स्थान पर एक मेले का आयोजन भी किया जाता है। तीन दिन तक लगने वाले इस मेले में हज़ारों की संख्या में भक्त पहुंच कर पुन्य कमाते हैं। भगवान जगन्नाथ स्वामी को तुलसी बेहद प्रिय है और इन्हे तुलसी अर्पण करना छप्पन भोग के बराबर पुण्य माना जाता है।भगवान जगन्नाथ के रथ पर सवार होने के साथ बुधवार को वाराणसी में रथयात्रा मेले की शुरुआत हो गयी। अपनी 200 से ज्यादा वर्षो पुरानी परंपरा को निभाते हुए बुधवार की सुबह भगवान जगन्नाथ ने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा संग रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दिए। मान्यता है कि बीमारी से ठीक होने के बाद भगवान घूमने के लिए रथ पर निकलते हैं जिसे रथयात्रा मेल कहा जाता है।
इस दौरान जगन्नाथ मंदिर के पुजारी राधेश्याम से बात करने पर उन्होंने बताया कि वाराणसी शहर के रथयात्रा चौराहे पर बुधवार की भोर से इस रथयात्रा मेले की शुरुआत हुई। सबसे पहले रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की आरती हुई जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों की भीड़ जुटी। उसके बाद भक्तों ने भगवान के रथ को खीच कर इस रथयात्रा मेले की शुरुआत की। वैसे तो रथयात्रा का यह पर्व मुख्य तौर पर पुरी में मनाया जाता है। मगर वाराणसी में भी इसकी शुरुआत पुरी ट्रस्ट के जरिये ही हुई और यहाँ भी यह उसी परंपरागत तरीके से मनाया जाता हैं।
मान्यता है कि रथयात्रा के इस पर्व पर भगवान अपने भाई और बहन के साथ नगर भ्रमण और अपनी मौसी के घर जाते हैं। भगवान के दर्शन और उनका रथ खीचने के लिए शहर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और यह पर्व एक मेला बन जाता है। भक्त ये मानते हैं कि रथयात्रा के पर्व पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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