Varanasi Trip is not complete without tasting the succulent and mouth-watering betel leafs of Varanasi. Such is the fame of this paan that even Bollywood has dedicated songs eulogising the paan. Keshav Tambul Bhandar near BHU gate and Ram Chaurasia Tambul Bhandar at Chowk are two best places where you can taste authentic Banarsi paan in the city.
Sunday, August 16, 2015
श्री बनखण्डी महादेव
सावन के महीने में देश-विदेश से लाखों भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचते हैं। पूरे महीने वाराणसी के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।श्री बनखण्डी महादेव जी का मंदिर 30 फीट व्यास और 55 फीट ऊंचा शिवलिंगाकार है। भदैनी स्थित वनखंडी साधुबेला आश्रम द्वारा बनवाया गया ये मंदिर परंपरागत शैली से अलग है।
इस मंदिर का शिलान्यास आश्रम के महंत राजर्षि आचार्य गणेशदास ने 1993 में किया था, जो 1998 मई में बनकर तैयार हुआ। ये शिवलिंगाकार मंदिर 100 फीट गुने 50 फीट के भूखंड पर स्थापित है। जमीन से 10 फीट ऊंचे और आठ स्तंभों पर बने मंदिर में जाने के लिए अर्धचंद्राकार 21 सीढ़ियां हैं।
महंत गौरी शंकरदास महाराज ने बताया कि पूरा मंदिर शिवलिंग के आकार का बना है। काशी में नागर, वेसर और द्रविड़ शैली के मंदिर ज्यादा हैं। इस मंदिर में तीन द्वार हैं, जो लिंगाकार हैं। गर्भगृह के बीच में उत्तरमुखी अरघे में शिवलिंग स्थापित है। वहीं, चारों तरफ राधा-कृष्ण, गणेश, हनुमान और दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है।
जयपुर के कारीगरों ने किया मंदिर का निर्माण
मंदिर का निर्माण जयपुर के कारीगरों द्वारा किया गया है। यहां स्थापित मूर्तियां भी इसी शहर से लाई गई हैं। इस मंदिर को बनाने में कुल 45 लाख रुपए खर्च हुए। बता दें कि इस आश्रम की स्थापना 1818 में स्वामी वनखंडी महाराज ने की थी। उन्हीं के नाम पर मंदिर का नाम 'वनखंडी' रखा गया। ये आश्रम उदासीन संप्रदाय की एक शाखा है। महंत बताते हैं कि अब भक्तों को दूर से ही शिवलिंग के दर्शन हो सकेंगे। लिंगाकार मंदिर को इस तरह बनाने का मकसद सिर्फ यही है कि भक्त आसानी से महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
Saturday, August 15, 2015
Friday, August 14, 2015
Thursday, August 13, 2015
राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित अशोक चक्र मेँ 24 तीलियोँ का प्रत्येक भारतीय के जीवन मेँ महत्व
सम्राट अशोक ने प्रत्येक नागरिक को खुश रहने के लिये 2 मुख्य बिन्दु बताये ।
(1) न अधिक तेज
(2) न अधिक धीमा
सम्राट अशोक के द्वारा बताये गये जीवन के 4 प्रमुख कारण बताये ।
(1) दुनिया मेँ दुःख है।
(2) दुःख का कारण है।
(3) कारण का निवारण है।
(4) निवारण के प्रति प्रयास करना।
सम्राट अशोक ने अपने राजतंत्र मेँ 8 महत्व पूर्ण बाते समाज के सामने रखी।
(1) सबको शिक्षा ।
(2) सबको सम्मान ।
(3) सबको मानसिक स्वतंत्रता ।
(4) सबको रोजगार ।
(5) सबको न्याय ।
(6) सबको चिकित्सा ।
(7) सबको कर्त्वयोँ के प्रति जागरुक रहना ।
(8) सभी को रास्ट्र के प्रति समर्पित ।
सम्राट अशोक ने जीवन मेँ अपनाने हेतु 10 महत्वपूर्ण नियम बताये ।
(1) सभी के प्रति दया भाव
(2) सभी के प्रति करुणा मैत्री
(3) सभी के प्रति शान्ति के लिये अग्रसर होना ।
(4) सभी के प्रति उन्नति के लिये कार्य करना ।
(5) सभी के प्रति क्षमा भाव होना
(6) अपनी आय का कुछ अंश सामाजिक उन्नति मेँ व्यय करना ।
(7) अपने पारिवारिक जीवन का निर्वाह करना ।
(8) अपनी उन्नति से किसी की अवनति ना करना ।
(9) अपने द्वारा किसी को सामाजिक, मानसिक पीड़ा न पहुचाना ।
(10) अपने स्वास्थ के प्रति सचेत ।
(1) न अधिक तेज
(2) न अधिक धीमा
सम्राट अशोक के द्वारा बताये गये जीवन के 4 प्रमुख कारण बताये ।
(1) दुनिया मेँ दुःख है।
(2) दुःख का कारण है।
(3) कारण का निवारण है।
(4) निवारण के प्रति प्रयास करना।
सम्राट अशोक ने अपने राजतंत्र मेँ 8 महत्व पूर्ण बाते समाज के सामने रखी।
(1) सबको शिक्षा ।
(2) सबको सम्मान ।
(3) सबको मानसिक स्वतंत्रता ।
(4) सबको रोजगार ।
(5) सबको न्याय ।
(6) सबको चिकित्सा ।
(7) सबको कर्त्वयोँ के प्रति जागरुक रहना ।
(8) सभी को रास्ट्र के प्रति समर्पित ।
सम्राट अशोक ने जीवन मेँ अपनाने हेतु 10 महत्वपूर्ण नियम बताये ।
(1) सभी के प्रति दया भाव
(2) सभी के प्रति करुणा मैत्री
(3) सभी के प्रति शान्ति के लिये अग्रसर होना ।
(4) सभी के प्रति उन्नति के लिये कार्य करना ।
(5) सभी के प्रति क्षमा भाव होना
(6) अपनी आय का कुछ अंश सामाजिक उन्नति मेँ व्यय करना ।
(7) अपने पारिवारिक जीवन का निर्वाह करना ।
(8) अपनी उन्नति से किसी की अवनति ना करना ।
(9) अपने द्वारा किसी को सामाजिक, मानसिक पीड़ा न पहुचाना ।
(10) अपने स्वास्थ के प्रति सचेत ।
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