Friday, January 23, 2015

श्री सरस्वती चालीसा

॥दोहा॥ जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥
तब ही मातु का निज अवतारी।पाप हीन करती महतारी॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामचरित जो रचे बनाई।आदि कवि की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्वाना।भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।केव कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करहिं अपराध बहूता।तेहि न धरई चित माता॥
राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करउं भांति बहु तेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥
समर हजार पाँच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥
मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।क्षण महु संहारे उन माता॥
रक्त बीज से समरथ पापी।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥
काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा॥
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥
भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित को मारन चाहे।कानन में घेरे मृग नाहे॥
सागर मध्य पोत के भंजे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥
करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करैं हमेशा।निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें सत बारा।बंदी पाश दूर हो सारा॥
रामसागर बाँधि हेतु भवानी।कीजै कृपा दास निज जानी॥
॥दोहा मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।
डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।
राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥


Monday, January 19, 2015

मौनी अमावस्या

हिंदू पंचांग के एक वर्ष में 12 अमावस्या आती हैं जिनमें माघ मास में आनी वाली अमावस्या या मौनी अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। घर में सुख-शांति रखने के लिए मौनी अमावस्या को पितरों को आमंत्रित कर उन्हें भोग दिया जाता है।
ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन दान-पुण्य करने से दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाता है। मौनी अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय कर आप कुंडली में मौजूद ग्रहों के विपरीत असर को खत्म कर एक सुखी, शांत और समृद्ध जीवन का आनंद ले सकते हैं।
अमावस्या को पितरों की तिथि माना जाता है। इस दिन घर में शुद्ध शाकाहारी भोजन बना कर उसका गाय के गोबर से बने उपले (कंडे) पर भोग लगाना चाहिए। यदि भोजन बनाना संभव नहीं हो तो खीर से भी भोग लगा सकते हैं।
इस दिन चीटियों के बिल पर शक्कर या बूरा मिला हुआ आटा डालें। ध्यान रखें कि ये ऎसे स्थान पर होना चाहिए जहां चीटियां किसी के पैरों के नीचे आकर दबे नहीं। इससे आपकी प्रत्येक मनोकामना पूर्ण होगी।
इस बार मौनी अमावस्या मंगलवार को आ रही है, ऎसे में आप हनुमानजी को चमेली के तेल मिलाकर सिंदूर चढ़ाए और सुन्दर कांड का पाठ करें। यदि सुंदर कांड का पाठ संभव नहीं हो तो 7 अथवा 11 बार हनुमानचालिसा का पाठ करें। इससे शनि तथा राहू समेत सभी बुरे ग्रहों का शमन होता है और घर में सौभाग्य की प्राप्ति होकर धन का आगमन शुरू हो जाता है।
मौनी अमावस्या पर शाम के समय किसी मंदिर में स्थित पीपल अथवा बड़ के वृक्ष की पूजा करें तथा देशी घी का दीपक जलाएं। इससे भी आपकी मनोकामना पूर्ण होती है।
इन दिन सुबह स्नान कर शिव मंदिर में जाएं और दूध मिश्रित जल अर्पण कर घी का दीपक जलाएं तथा महामृत्युंजय की कम से कम एक माला जपें इससे भी सुख-समृदि्ध का मार्ग खुलता है। 

Wednesday, January 14, 2015

मकर संक्रांति

हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। जिस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस वर्ष 14 जनवरी की शाम को सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा है, इस कारण 14 नहीं, 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाना चाहिए। इस संबंध में पंचांग भेद भी हैं। प्राचीन परंपराओं के अनुसार इन दिन दान और नदी स्नान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग संक्रांति पर दान करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और दुख-दर्द से छुटकारा मिलता है।
मकर संक्रांति के दिन लोग खिचड़ी बनाते हैं और सूर्य देव को खिचड़ी प्रसाद स्वरूप अर्पित करते हैं। सूर्य देव भी इस दिन भक्तों से प्राप्त खिचड़ी का स्वाद बड़े आनंद से लेते हैं। आखिर ऐसा क्यों न हो, इस दिन खिचड़ी बनाने और इसे ही प्रसाद स्वरूप देवाताओं को अर्पित करने की परंपरा शुरू करने वाले भगवान शिव जो माने जाते हैं।
खिचड़ी की बात सुनकर अगर आपको पिछले साल की खिचड़ी याद आ रही है तो हो सकता है कि मुंह में पानी आ गया हो। साल भर में आपने भले ही कितनी ही बार खिचड़ी खायी हो लेकिन मकर संक्रांति जैसी खिचड़ी का स्वाद आपको सिर्फ मकर संक्रांति के मौक पर ही मिल सकता है। मान्यता है कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा की शुरूआत हुई।
यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। खिचड़ी बनने की परंपरा को शुरू करने वाले बाबा गोरखनाथ थे। बाबा गोरखनाथ को भगवान शिव का अंश भी माना जाता है। कथा है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमज़ोर हो रहे थे।.


Thursday, December 25, 2014

क्रिसमस का पर्व

मसीही समुदाय का सबसे बड़ा क्रिसमस का पर्व बुधवार की आधी रात से प्रारंभ हो गया। सभी चर्च आकर्षक ढंग से सजाए गए थे। घड़ी की सुइयों ने एक होकर 12 बजने का संकेत दिया और हर तरफ प्रभु यीशु के आगमन की खुशियां बिखर गई। प्रभु जन्म के साथ ही क्रिसमस त्योहार का आगाज हो गया। मसीही बस्तियों में आतिशबाजी छोड़कर खुशी का इजहार किया गया।
मुख्य आयोजन महागिरजा में
छावनी क्षेत्र के सेंट कैथीड्रल (महागिरजा) में मुख्य आयोजन हुआ। वाराणसी धर्मप्रांत के प्रशासक फादर युजीन जोसेफ ने मुख्य हाल में नवजात शिशु प्रभु यीशु को हाथों में ऊपर उठाकर लोगों को प्रभु के आगमन की खुशखबरी सुनाई। आहिस्ता-आहिस्ता चलते हुए परिसर में सजी चरनी में स्थापित कर दिया। इससे पहले फादर ने मुख्य प्रार्थना हाल में प्रार्थना की। इस दौरान बड़ी संख्या में गैर मसीही भी मौजूद थे।
क्रिसमस कैरल से गूंजे चर्च
प्रभु के आगमन के साथ ही लोगों का एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई का सिलसिला शुरू हो गया। गिरजाघरों में कैरल गीतों की प्रस्तुति की गई। हिन्दी, अंग्रेजी और भोजपुरी में गाये कैरेल से चर्च गूंज उठे। कैंटोंनमेंट स्थित लाल गिरजाघर, सेंट जांस मढ़ौली चर्च, सिगरा, रामकटोरा, गौदौलिया, तेलियाबाग आदि चर्चो में आया यीशु जगत में आया, चरनी में चमका उजियारा, भइया हो उगल गगन में तारा आदि गीतों की प्रस्तुति की गई।
बांटे गए केक
सभी गिरजाघरों में प्रार्थना के बाद केक बांटे गए। लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर क्रिसमस की शुभकामनाएं दी। शहर के तमाम चर्च में क्रिसमस के अवसर पर खास सजावट की गयी थी। बेहतरीन लाइटिंग के नजारे लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए थे।
बाजारों में रौनक
क्रिसमस पर बाजारों में रौनक भी कुछ खास ही थी। क्रिसमस के सजावटी सामानों की दुकानें खरीदारों से भरी पड़ी थीं। लोग क्रिसमस ट्री, अलग-अलग डिजाइन के सितारे, सेंटा क्लाज के पुतलों की खरीदारी में व्यस्त थे। क्रिसमस ट्री असली भी थे और नकली भी।
केक भी बिके खूब
क्रिसमस में केक का होना जरूरी है इसके चलते बेकरी की दुकानों पर लोगों की खूब भीड़ उमड़ी। लोगों ने क्रिसमस केक का आर्डर पहले ही दे रखा था।













 






 

Saturday, December 13, 2014

Nichigat Suzan Horinji Temple Sarnath

The Nichigai Suzan Horinji Temple is a Japanese temple in Sarnath, India. It is one of the many Buddhist temples of various Buddhist sects in Sarnath, which is considered a most significant centre for Buddhism in India.







Statue Of Buddha In Dhamma Chakka Pravarttana Mudra

This is world's tallest statue of Gautam Buddha in Dhamma Chakka Pravarttana Mudra and is situated in Shivali Vietnam Temple Sarnath (Varanasi).It is made up of red stone from Chunar and was inaugrated on 6th of December 2014.It is 70ft tall and has got completed in 4 years. There is a conference room below the statue named as "DHAMMA HALL".