रविवार, 20 नवंबर 2016

कालभैरव अष्टमी

मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष के आठवें दिन कालभैरव अष्टमी का व्रत रखा जाता है। शिवपुराण के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। इन्हें काशी का कोतवाल माना जाता है। कालभैरव अष्टमी व्रत भय और दुखों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। इस दिन विशेष रूप से शिव जी की भैरव और ईशान नाम से पूजा की जाती है। साल 2016 में यह व्रत 21 नवंबर को रखा जाएगा। 
कालभैरव अष्टमी से जुड़ी कथा
एक कथा के अनुसार एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने शिव जी के रूप-रेखा और वेश-भूषा पर कुछ अपशब्द बोल दिया, जिससे वह बहुत क्रोधित हुए तथा उनके शरीर से छाया के रूप में काल भैरव की उत्पत्ति हुई। मार्गशीर्ष माह की अष्टमी तिथि को ही काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी। क्रोध से उत्पन्न काल भैरव जी ने अपने नाखून से ब्रह्मा जी का सिर काट दिया।
इसके बाद ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए काल भैरव तीनों लोकों में घूमें परन्तु कही भी उन्हें शांति नहीं मिली, अंत में घूमते हुए वह काशी पहुंचे जहां उन्हें शांति प्राप्त हुई। वहां एक भविष्यवाणी हुई जिसमें भैरव बाबा को काशी का कोतवाल बनाया गया तथा वहां रहकर लोगों को उनके पापों से मुक्ति दिलाने के लिए वहां बसने को कहा गया।
कालभैरव अष्टमी व्रत विधि
अष्टमी के दिन प्रातः स्नान करने के पश्चात पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर कालभैरव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्यक्ति को पूरे दिन व्रत रखकर आधी रात के समय धूप,दीप,गंध,काले तिल,उड़द, सरसों तेल आदि से पूजा कर जोर-जोर से बाबा की आरती करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरी रात जागरण करना चाहिए।
माना जाता है कि  भैरव बाबा और काल भैरव की सवारी कुत्ता है इसलिए व्रत की समाप्ति पर घर पर पकवान बनाकर सबसे पहले कुत्ते को खिलाना चाहिए। इस दिन कुत्ते को भोजन करने से भैरव बाबा बहुत प्रसन्न होते हैं।
कालभैरव अष्टमी व्रत फल
मान्यता है कि इस व्रत की महिमा से व्रती के सारे विघ्न दूर हो जाते हैं। भूत-प्रेत तथा जादू-टोना जैसी बुरी शक्तियों का उस कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। भैरव बाबा की पूजा और आराधना करने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। 

शनिवार, 19 नवंबर 2016

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष 100 और 10 रूपए के स्मारक सिक्को सिकके आम जनता के लिए उपलब्ध

१२ मई २०१६ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में स्वतन्त्रता भवन सभागार में समारोह में सुबे के राज्यपाल रामनाइक ने 100 रुपये का शताब्दी वर्ष स्मृति सिक्का और बीएचयू के ‘लोगो’ वाला 10 रुपये का सिक्का भी जारी किया था और इसका प्रतीक महामहिम को सौंपा। खास बात यह है कि शताब्दी वर्ष में बीएचयू में तैयार 100 रुपये के सिक्के में भी विश्वविद्यालय के सौ सालों का इतिहास समाहित है। यह सिक्का मॉन्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रचलन में नहीं होगा बल्कि इसे विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष की स्मृति के रूप में संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा मंच से राज्यपाल ने जिस 10 रुपये के सिक्के को जारी किया वह पूरे देश में चलेगा। 
आम जनता के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष 100 और 10 रूपए के स्मारक सिक्को के सेट दिनांक 14/November/2016 से 14/January/2016 तक बुकिंग के लिए उपलब्ध। निचे दिए गए लिंक से आर्डर फॉर्म डाउनलोड करके इंडियन गवर्नमेंट मिंट मुम्बई से स्मारक सिकके की बुकिंग करवाये 
http://igmmumbai.spmcil.com/Interface/AllSellableProducts.aspx?product_cat=Current




मंगलवार, 15 नवंबर 2016

Dev Deepawali

Dev Deepawali is celebrated on the occasion of Kartik Poornima when the Ghats of Varanasi come alive with thousands of Diyas (earthen lamps). Dev Deepavali, celebrated on the fifteenth day of Diwali, is a tribute to river Ganga by the people of Varanasi. Dev Deepavali is held on the full moon day in the month of Kartik (also known as Kartik Purnima) and is observed with great fanfare and feasts. It is believed that on the day of Dev Deepavali, the Gods descend on Earth. It is interesting to note that the Kartik Purnima festival also coincides with the Jain light festival and Guru Nanak Jayanti.

















रविवार, 13 नवंबर 2016

A Look Back to 1978 When Currency Notes Were Last Scrapped

It was on 16 January 1978 that the country was told that the Janata Party coalition, which had assumed office a year earlier, has decided to scrap Rs 1,000, Rs 5,000 and Rs 10,000 notes.
The Reserve Bank of India’s (RBI) history (third volume) details how things happened.



शनिवार, 12 नवंबर 2016

बैंक खुलने से पहले पहुंचे लोग

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर की रात को राष्ट्र को किए अपने संबोधन में 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी के बाद वीरवार को बैनों के अंदर और बाहर ग्राहकों का जमावड़ा लगा रहा। लोग बैंक खुलने से पहले ही बैंकों में पहुँच गए और बैंक बंद होने के बाद भी कुछ लोग बाहर जानेको राजी नहीं हुए। बैंक अधिकारियों और ग्राहकों के बीच नोंक-झोंक सारा दिन चलती रही। कई बैंकों में सुरक्षा के लिए पुलिस तक को बुलाना पड़ा।
सारा दिन लगी रही नोट बदलने और कैश जमा कराने की होड़ के बीच कहीं सिस्टम खराब रहा तो कहीं स्टाफ ने लोगों को दो टूक जवाब दिया। कई बैंकों में दोपहर से जवाब मिलने लगा कि बैंक में पैसे खत्म हो गए हैं। इस सब कुछ के चलते जनता बेहाल हुई और बहुत सारे लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौड़ धूप में जहां कुछ लोग केंद्र सरकार को कोस रहे थे, तो वहीं ऐसे भी बहुत सारे लोग थे, जो पीएम के फैसले को देश हित में बताते हुए हर तरह की मुश्किल झेलने को तैयार थे।